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कुशाग्र हत्याकांड में तीनों हत्यारों को दोहरी उम्रकैद पर आढ़तिया कपड़ा एसोसिएशन सूरत ने अदालत का जताया आभार

AKAS इस जघन्य अपराध की घोर भर्त्सना करता हैं : प्रहलाद भाई अग्रवाल 

सूरत (योगेश मिश्रा) कानपुर के चर्चित कुशाग्र हत्याकांड में आखिर 25 महीने बाद फैसला आ गया। अपर सत्र न्यायाधीश सुभाष सिंह ने कुशाग्र के तीनों हत्यारों ट्यूशन टीचर रचिता वत्स, प्रेमी प्रभात शुक्ला और उसके दोस्त शिवा गुप्ता को दोहरी उम्रकैद की सजा सुनाई है।

इस फैसले को लेकर सूरत शहर में व्यापारियों के लिए कार्य कर रहे संस्थान आढतियां कपड़ा एसोसिएशन सूरत (AKAS) ने अदालत के इस फैसले का स्वागत करते हुए सुप्रीम कोर्ट से फांसी की भी मांग की गई है । आपको बताते चले कि मृतक के पिता मनीष कनोडिया जी की सूरत के इंडिया टेक्सटाइल मार्केट रिंग रोड पर आढत के व्यवसाई हैं। आपको बताते चले कि अपहरण और हत्या दोनों ही मामलों में तीनों को आजीवन कारावास हुई है पर दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। रचिता पर एक लाख और बाकी दोनों दोषियों पर 1.10-1.10 लाख का जुर्माना भी लगाया गया है। अभियोजन के साथ ही कुशाग्र की मां, पिता और चाचा ने फांसी की सजा की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के छह निर्णयों का हवाला देते हुए कोर्ट ने इस मांग को नहीं माना। आपको बताते चले कि मृतक के पिता मनीष कनोडिया आढतियां कपड़ा एसोसिएशन संस्थान का आजीवन सदस्य हैं । घटना के बाद संस्थान के अध्यक्ष प्रहलाद अग्रवाल ने दुख जताते हुए कहा कि यह घटना निंदनीय है और इस घटना पर तीनों आरोपियों को फांसी की सजा होना स्वाभाविक है । सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस प्रभात और शिवा को जेल ले जाने लगी तो वकीलों ने दोनों को पीटने का भी प्रयास किया। इसके चलते पुलिस दोनों को दौड़ाते दौड़ाते हुए चौथी मंजिल से नीचे लाई और वाहन में बैठाकर जेल ले गई। हाईस्कूल में पढ़ने वाले कुशाग्र कनोडिया की 30 अक्तूबर 2023 को कोचिंग जाते समय अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। सजा के बिंदु पर अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपनी-अपनी बात रखी। इसके बाद कुशाग्र के पिता मनीष कनोडिया ने भी अपनी बात कही। बोले-अभियुक्तों ने साजिश के तहत पूरा काम किया। उनके सूरत जाने के दो दिन बाद ही वारदात को अंजाम दिया गया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने रचिता को हर समय सहारा दिया। उसने विश्वास तोड़ दिया। प्रेमी प्रभात शुक्ला और साथी शिवा गुप्ता को जेल भेजा गया था। मंगलवार को अदालत ने तीनों को दोषी करार दिया था। सजा के मामले में गुरुवार को लंच के बाद सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट वकीलों से खचाखच भरा हुआ था। सजा के बिंदु पर डीजीसी क्रिमिनल दिलीप अवस्थी, एडीजीसी भास्कर मिश्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता कमलेश पाठक और चिन्मय पाठक ने अपनी बात रखते हुए फांसी की मांग की। अभियोजन की ओर से अधिवक्ताओं ने गुरु-शिष्य परंपरा और सामाजिक सिद्धांतों व मूल्यों का हवाला देते हुए कुशाग्र की मां सोनिया कनोडिया ने कहा कि ये लोग साजिश के तहत घर आए। नजदीकियां बढ़ाने के बाद पूरी घटना को अंजाम दिया। यह अपराध रेयर ऑफ द रेयरेस्ट है। इसलिए फांसी मिलनी चाहिए। चाचा सुमित कनोडिया ने कहा कि आम आदमी का विश्वास कोर्ट पर है। कोर्ट सख्त से सख्त सजा देगा, तभी अपराधों पर अंकुश लगेगा। इस प्रकरण को विरलतम श्रेणी का बताया। हालांकि बचाव पक्ष ने इसका खंडन किया। अभियुक्तों का पहला अपराध होने, क्रिमिनल हिस्ट्री न होने, परिवार में कमाई का जरिया न होने की दलील देते हुए कम से कम सजा की मांग की। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद उम्रकैद की सजा सुना दी। इधर सूरत शहर के सभी कपड़ा व्यापारियों ने अदालत के फैसले का सम्मान करते हुए अदालत का आभार जताया है । तो वहीं दूसरी ओर आढतियां कपड़ा एसोसिएशन संस्थान ने अपने संस्थान की ओर से कोर्ट का सम्मान करते हुए उक्त तीनों आरोपियों को फांसी की सजा दिए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से पत्र के माध्यम से निवेदन करेगा । कोर्ट ने 184 पेज का फैसला सुनाया कुशाग्न हत्याकांड का फैसला 814 दिन में आया है। चूंकि 9 फरवरी 2024 को फाइल सत्र न्यायालय भेजी गई थी।

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