
सूरत (योगेश मिश्रा) शहर की अदालत ने पिता से बच्चे की कस्टडी पाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 97 के तहत सर्च वारंट प्राप्त करने की मां की अर्जी खारिज कर दी। पिता की ओर से एडवोकेट सोनल शर्मा ने दलील दी कि वर्तमान अर्जी कानून के खिलाफ है और अर्जी सुनवाई योग्य नहीं है। कोर्ट ने एडवोकेट सोनल शर्मा की दलीलों पर विचार करने के बाद मां की अर्जी खारिज कर दी। भेस्तान में रहने वाली एक विवाहित महिला ने सूरत कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 97 के तहत अर्जी दाखिल कर बताया था कि उसका 3 साल का बेटा पिछली तारीख 25. 9.2023 को उसके घर से गायब हो गया था। विवाहित महिला को पता चला था कि उसका पति उसके बेटे को उसकी सहमति के बिना और उसे स्थायी रूप से अपने पास रखने के इरादे से जबरन ले गया है। वह उसे अपने साथ ले गया। इसलिए, उसने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 97 के तहत तलाशी वारंट के लिए आवेदन किया और बच्चे की हिरासत मांगी। इसलिए, वकील सोनल शर्मा पिता की ओर से अदालत में पेश हुईं और तर्क दिया कि वर्तमान आवेदन पोषणीय नहीं है। बच्चे की हिरासत उसके पिता के पास है। इसलिए, जब बच्चे की हिरासत पिता के पास है, तो उस हिरासत को अवैध नहीं कहा जा सकता है। कानूनी पिता को बच्चे की हिरासत रखने का पूरा अधिकार है। इसलिए, वह हिरासत सीआरपीसी की धारा 97 में दी गई परिभाषा के अंतर्गत नहीं आती है। इस आवेदन को खारिज करने के लिए एक आवेदन दिया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि यदि वर्तमान कानून को ध्यान में रखा जाए, तो अदालत के पास इस खंड के अनुसार नाबालिग बच्चे की हिरासत देने की शक्ति नहीं है।



