
सूरत (योगेश मिश्रा) शहर के कपड़ा बाजार में वीवर्स और ट्रेडर्स को निशाना बनाने वाली साइबर-कम-फिजिकल ठगी की एक नई मोडस ऑपरेंडी सामने आने से व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई है। कथित तौर पर ठग पहले प्रतिष्ठित कपड़ा व्यापारियों की फर्म का नाम, जीएसटी नंबर और अन्य कारोबारी जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद उसी पहचान का इस्तेमाल कर वीवर्स से फर्जी ऑर्डर पर कपड़ा मंगवाया जाता है। माल टेंपो में लोड होकर वास्तविक पार्टी तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में वाहन को डायवर्ट कराकर माल गायब कर दिया जाता है। इस तरह की 4-5 घटनाओं की आशंका जताई जा रही है।
सोशल मीडिया और ट्रेड पोर्टल से जुटाते हैं जानकारी
ठगी के इस कथित नेटवर्क में सबसे पहले सोशल मीडिया और ट्रेड पोर्टल के जरिए प्रतिष्ठित ट्रेडर्स की कारोबारी जानकारी जुटाई जाती है। इसमें फर्म का नाम, जीएसटी नंबर और उपलब्ध संपर्क संबंधी जानकारी शामिल होती है। जानकारी हासिल करने के बाद ठग वीवर से संपर्क कर खुद को संबंधित प्रतिष्ठित फर्म से जुड़ा बताकर कपड़े का तत्काल ऑर्डर देते हैं। प्रतिष्ठित फर्म का नाम और जीएसटी नंबर होने के कारण वीवर को भी ऑर्डर वास्तविक होने का भरोसा हो जाता है। इसके बाद तय माल तैयार कर टेंपो के जरिए भेज दिया जाता है।
माल रवाना होते ही शुरू होता है ठगी का दूसरा चरण
माल टेंपो में लोड होकर रवाना होने के बाद ठग ड्राइवर से संपर्क करते हैं। खुद को संबंधित पार्टी का व्यक्ति बताते हुए ड्राइवर को बताया जाता है कि कपड़े को आगे डाइंग, प्रिंटिंग या अन्य प्रोसेसिंग के लिए भेजना है। इसी बहाने टेंपो को वास्तविक डिलीवरी पते से हटाकर किसी अन्य स्थान की ओर डायवर्ट कराया जाता है।
सुनसान जगह पर माल दूसरे वाहन में ट्रांसफर
आरोप है कि टेंपो को किसी सुनसान स्थान, गोदाम या बताए गए अन्य ठिकाने पर पहुंचाया जाता है। वहां टेंपो में भरा कपड़ा दूसरे वाहन में ट्रांसफर कर लिया जाता है। माल दूसरे वाहन में जाते ही ठग अपने मोबाइल फोन बंद कर देते हैं और संपर्क से बाहर हो जाते हैं। इसके बाद जब वीवर माल की डिलीवरी के संबंध में वास्तविक व्यापारी से संपर्क करता है तो पूरे मामले का खुलासा होता है। वास्तविक ट्रेडर को पता चलता है कि उसने ऐसा कोई ऑर्डर दिया ही नहीं था और उसके नाम तथा जीएसटी नंबर का इस्तेमाल कर किसी अन्य व्यक्ति ने वीवर से माल मंगवाया था।
व्यापारी की पहचान बन रही ठगी का हथियार
ठगी के इस तरीके में सबसे गंभीर पहलू यह है कि ठग किसी अनजान या फर्जी फर्म के बजाय बाजार में प्रतिष्ठित और वास्तविक व्यापारियों की पहचान का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे वीवर को ऑर्डर पर संदेह कम होता है और ठग आसानी से माल रवाना करवाने में सफल हो जाते हैं।इस मामले में प्रतिष्ठित ट्रेडर्स की कारोबारी पहचान, जीएसटी नंबर और फर्म की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के दुरुपयोग को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
4-5 घटनाओं की आशंका, जांच की जरूरत
कपड़ा कारोबार से जुड़े सूत्रों के अनुसार इस तरह की 4-5 घटनाएं सामने आने की आशंका है। यदि अलग-अलग मामलों की कड़ियों को जोड़ा जाए तो संभव है कि एक ही तरह की कार्यप्रणाली अपनाकर ठगी की गई हो। ऐसे में पूरे मामले की जांच कर इस मोडस ऑपरेंडी के पीछे सक्रिय लोगों तक पहुंचना जरूरी माना जा रहा है।
वीवर्स और ट्रेडर्स को सतर्क रहने की जरूरत
व्यापारियों के लिए यह मामला एक बड़ी चेतावनी के रूप में सामने आया है। विशेषज्ञों और कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि नए या तत्काल ऑर्डर मिलने पर केवल जीएसटी नंबर या फर्म का नाम देखकर भरोसा नहीं करना चाहिए। ऑर्डर देने वाले व्यक्ति का मोबाइल नंबर, अधिकृत संपर्क, ईमेल और फर्म के पुराने रिकॉर्ड से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना जरूरी है। इसके अलावा माल रवाना होने के बाद ड्राइवर को किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर डिलीवरी लोकेशन बदलने से बचना चाहिए। यदि पार्टी की ओर से डाइंग, प्रिंटिंग या प्रोसेसिंग के लिए माल किसी अन्य स्थान पर भेजने को कहा जाता है तो संबंधित ट्रेडर से सीधे पुष्टि किए बिना वाहन को डायवर्ट नहीं किया जाना चाहिए।कपड़ा बाजार में सामने आई इस नई ठगी की कार्यप्रणाली ने वीवर्स और ट्रेडर्स दोनों को सतर्क कर दिया है। अब जरूरत है कि व्यापारी अपनी फर्म की सार्वजनिक कारोबारी जानकारी के दुरुपयोग पर नजर रखें और संदिग्ध ऑर्डर या डिलीवरी लोकेशन में बदलाव की स्थिति में तत्काल संबंधित व्यापारी तथा पुलिस को सूचना दें।अगर चाहें तो मैं इसी खबर का और ज्यादा सनसनीखेज अखबार वाला मुख्य शीर्षक और 2 लाइन का बॉक्स आइटम भी बना सकता हूं।



