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 पांडेसरा जीआईडीसी में खुलेआम छोड़े जा रहे रासायनिक अपशिष्ट पर सवाल

रंगीन व केमिकलयुक्त पानी से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य को खतरे की आशंका, जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर उठे सवाल

सूरत (योगेश मिश्रा) शहर में औद्योगिक नगरी सूरत के पांडेसरा जीआईडीसी क्षेत्र में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कथित रासायनिक अपशिष्ट को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि मीरा डाइंग मिल की ओर से निकलने वाला केमिकलयुक्त एवं रंगीन अपशिष्ट पानी खुले तौर पर छोड़े जाने से आसपास के वातावरण पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। यदि इन आरोपों में तथ्य है तो यह स्थिति पर्यावरण के साथ-साथ क्षेत्र में रहने और काम करने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन सकती है।

रंगीन पानी और तेज दुर्गंध से परेशानी का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि औद्योगिक गतिविधियों से निकलने वाले रंगीन एवं रासायनिक पानी के कारण आसपास के क्षेत्र में दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या पैदा हो सकती है। खुले नालों अथवा अन्य जल निकासी मार्गों में इस प्रकार का अपशिष्ट पहुंचने पर मिट्टी, भूजल और आसपास के जलस्रोतों के प्रदूषित होने की आशंका बनी रहती है।

नियमों के पालन पर निगरानी जरूरी

औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट के निस्तारण के लिए निर्धारित पर्यावरणीय मानकों और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन किया जाना आवश्यक है। ऐसे में सवाल यह है कि संबंधित इकाई द्वारा अपशिष्ट के उपचार और निस्तारण के लिए निर्धारित व्यवस्था का कितना पालन किया जा रहा है और इसकी नियमित जांच किस स्तर पर की जा रही है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) तथा संबंधित विभाग द्वारा क्षेत्र में औचक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच की जाए। यदि अपशिष्ट पानी के नमूनों में निर्धारित मानकों से अधिक रासायनिक तत्व पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविक स्थिति

पांडेसरा जीआईडीसी जैसे घनी औद्योगिक गतिविधियों वाले क्षेत्र में पर्यावरणीय नियमों की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि मीरा डाइंग मिल से संबंधित लगाए जा रहे आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण संबंधित विभाग की जांच, अपशिष्ट पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही किया जा सकता है।

ऐसे में अब देखना यह है कि संबंधित प्रदूषण नियंत्रण विभाग इन शिकायतों और आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है तथा क्या मौके पर निरीक्षण कर पानी के नमूने लिए जाते हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होगी और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।

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