
सूरत (योगेश बी. मिश्रा) शहर में विश्वासघात और आर्थिक धोखाधड़ी के दो गंभीर मामले सामने आए हैं। एक मामले में विदेश भेजने और वर्क परमिट दिलाने के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर 22 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप है, जबकि दूसरे मामले में कबाड़ के कारोबार में करीब 1.04 करोड़ रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। दोनों घटनाओं ने शहर में व्यापारिक और व्यक्तिगत लेन-देन की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।पहले मामले में अडाजन क्षेत्र की एक महिला इमिग्रेशन कंसल्टेंट की शिकायत के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने विदेश में नौकरी और वर्क परमिट दिलाने का भरोसा देकर महिला कंसल्टेंट का विश्वास जीता था। इसके बाद यूके और कनाडा में नौकरी दिलाने के नाम पर दो क्लाइंट से कुल 22 लाख रुपये लिए गए। आरोप है कि नौकरी के लिए जरूरी सर्टिफिकेट ऑफ स्पॉन्सरशिप (CoS) और अन्य दस्तावेजों के नाम पर फर्जी कागजात उपलब्ध कराए गए। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए गए। एक क्लाइंट को फर्जी दस्तावेजों के कारण 10 साल के प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस पूरे मामले में उसे 16.80 लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों में जांच शुरू की है।वहीं दूसरे मामले में सूरत के कबाड़ कारोबार में करीब 1.04 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है। इस मामले में भी व्यापारिक विश्वास का दुरुपयोग कर बड़ी रकम की आर्थिक हेराफेरी किए जाने की शिकायत सामने आई है। हालांकि उपलब्ध जानकारी में शिकायतकर्ता और आरोपियों के नाम तथा धोखाधड़ी के तरीके का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है। इन दोनों घटनाओं ने सूरत में आर्थिक लेन-देन और विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रही गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विदेश जाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को किसी भी एजेंसी को रकम देने से पहले उसके दस्तावेजों और नौकरी के प्रस्ताव की सत्यता जांचनी चाहिए। वहीं व्यापारियों को भी बड़े आर्थिक लेन-देन में लिखित समझौते और भुगतान के प्रमाण सुरक्षित रखने चाहिए। पुलिस जांच के बाद ही दोनों मामलों की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।



